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जीव हिंसा महापाप

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जीव हिंसा महापाप है। गला काटै कलमा भरै, किया करै हलाल। साहिब लेखा मांगसी तब होगा कौन हवाल।।           कबीर, दिनको रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय।              यह खून वह वंदगी, कहुं क्यों खुशी खुदाय।।  पूर्ण परमात्मा का आदेश नहीं है माँस खाने का ।। परमात्मा   ने इंसान तो क्या जानवरों को भी मांस खाने की इजाजत नहीं दी।  सबके खाने के लिए फल, सब्जियां, अनाज, और पेड़ पौधे बनाये हैं। अधिक जानकारी के लिए देखें साधना tv 7:30pm   https://youtu.be/E0UBS4KKymo

नशा नाश का दूजा नाम

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नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। इस का किसी भी शास्त्र में उल्लेख नहीं कि नशा करें। यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है। नशा नाम की दीमक मानव समाज को खोखला कर चुकी है। नशा मुक्ति केंद्र 

अंध श्रद्धा भक्ति कैसे प्रारम्भ हुई ?

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      सुदामा जी पंडित थे  सुदामा जी ब्राह्मण कुल में जन्मेथे। निर्धनता चरम पर थी। कई बार बच्चे भी भूखे सो जाते थे। सुदामा जी की धर्मपत्नी को पता था कि द्वारिका के राजा श्री कृष्ण जी के साथ सुदामा जी की अच्छी मित्रता है। पत्नी ने बहुत बार कहा कि आप अपने राजा मित्र कृष्ण से कुछ धन माँग लाओ। सुदामा जी कहते थे कि पंडित का काम माँगना नहीं होता है। परमात्मा के विधान को समझकर उसके अनुकूल जीवन यापन करना होता है। गरीबदास जी ने भी कहा है कि: - गरीब, नट,पेरणा कांजर सांसी, मांगत हैं भठियारे । जिनकी भक्ति में लौ लागी, वो मोती देत उधारे ।। गरीब, जो मांगै सो भडूवा कहिए, दर-दर फिरै अज्ञानी । जोगी जोग सम्पूर्ण जाका,मांग ना पीवै पानी ।। परंतु पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर विप्र सुदामा जी अपने मित्र श्री कृष्ण जी के पास चले गए । श्री कृष्ण जी ने उनका विशेष सत्कार किया मुठ् ठीभर चावल साथ लेकर गए थे जो श्री कृष्ण जी ने चाव के साथ खाए । चरण तक धोये और कुशल-मंगल पूछा तो पंडित सुदामा जी ने कहा कि हे  भगवान ! मुझे किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है । आपकी कृपा से ठीक निर्वाह हो र...